5 सूत्रीय मांगों पर 3 दिन से लगातार धरने पर बैठे विद्यार्थी, कॉलेज प्रशासन को विशाल धरना प्रदर्शन का अल्टीमेटम

टोंक, (पीयूष गौत्तम)। टोंक में स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्रों ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के नेतृत्व में 8 अगस्त को पीजी कॉलेज के ताला लगाकर प्रदर्शन किया और अनिश्चितकालीन के लिए टेंट लगाकर धरना दिया। यह आंदोलन कॉलेज प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही के चलते उत्पन्न हुआ है, जिससे छात्रों की शिक्षा और उनके भविष्य पर गहरा असर पड़ रहा है।

छात्र संघ अध्यक्ष की आवाज
छात्र संघ अध्यक्ष दिनेश देवेन्दा ने कहा कि यह महाविद्यालय टोंक जिले का सबसे पुराना और सबसे बड़ा महाविद्यालय है, लेकिन यहाँ की समस्याओं के कारण नामांकन लगातार कम होता जा रहा है। पिछले पांच वर्षों से ABVP इन समस्याओं के समाधान के लिए ज्ञापन और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से प्रयास कर रही है, लेकिन प्रशासन की अनदेखी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

छात्रों की जायज़ मांगें
छात्रों की मांगें न केवल जायज़ हैं बल्कि महाविद्यालय की बेहतरी के लिए भी आवश्यक हैं:

  1. खेल मैदान का अतिक्रमण हटवाना और चार दीवारी करवाना: खेल मैदान पर अतिक्रमण और सुरक्षा के अभाव में छात्रों के खेल और शारीरिक गतिविधियाँ प्रभावित हो रही हैं।
  2. रविंद्र उद्यान का सौंदर्यकरण: उद्यान की दुर्दशा से न केवल छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, बल्कि यह महाविद्यालय की सुंदरता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
  3. रिक्त पदों पर नियुक्ति: महाविद्यालय में व्याख्याता, शारीरिक शिक्षक (पीटीआई), पुस्तकालयाध्यक्ष (लाइब्रेरियन), एलडीसी, यूडीसी, और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रिक्त पदों की नियुक्ति न होने से शिक्षण और प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न होती है।
  4. भवनों का पुनर्निर्माण: महाविद्यालय भवन, कैंटीन भवन, और पुस्तकालय भवन की जर्जर अवस्था को देखते हुए उनका पुनर्निर्माण अत्यंत आवश्यक है।
  5. NCC छात्रों के लिए फायरिंग रेंज की व्यवस्था: NCC छात्रों के प्रशिक्षण के लिए फायरिंग रेंज की व्यवस्था न होने से उनका प्रशिक्षण अधूरा रह जाता है।

प्रशासन की उदासीनता
महाविद्यालय प्रशासन की उदासीनता और छात्रों की समस्याओं के प्रति उनकी अनदेखी के चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई है। प्रशासन की लापरवाही के चलते महाविद्यालय का इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी हालत में है। यह स्थिति दर्शाती है कि प्रशासन शायद सोचता है कि समस्याओं का समाधान एक जादू की छड़ी से हो जाएगा।

छात्रों का दृढ़ संकल्प
छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर अपनी एकजुटता और दृढ़ संकल्प को दिखाते हुए महाविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। जिला संयोजक अजय डोई ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अगर हमारी समस्याओं का समाधान नहीं होता है, तो मैं तब तक पैरों में चप्पल नहीं पहनूंगा। यह दिखाता है कि छात्रों में कितनी निराशा और आक्रोश है।

प्रशासन की हास्यात्मक निष्क्रियता
महाविद्यालय प्रशासन पर यह कहना उचित होगा कि उनके पास सभी समस्याओं का समाधान होता है, लेकिन सिर्फ कागज पर! खेल मैदान की चार दीवारी और रविंद्र उद्यान का सौंदर्यकरण करने से उनका कॉफी ब्रेक खराब हो जाएगा, ऐसा शायद वे सोचते हैं।

आगे का रास्ता
8 अगस्त से अब तक, छात्रों ने लगातार धरना प्रदर्शन किया, लेकिन कुम्भकर्ण की नींद में सोया प्रशासन जागने का नाम नहीं ले रहा है। अब इनकी नींद तोड़ने के लिए छात्रों ने सोमवार को एक विशाल धरना प्रदर्शन का एलान कर दिया है। देखना दिलचस्प रहेगा कि कॉलेज प्रशासन जगता भी है या हमेशा की तरह छात्रों को अनदेखा करता रहेगा।

यह स्थिति महाविद्यालय प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही को उजागर करती है। जो जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन की थी, आज उसे पूरा करवाने के लिए छात्र धरना देकर प्रयास कर रहे हैं। महाविद्यालय प्रशासन को यह समझना होगा कि समस्याओं का समाधान कागजों पर नहीं, बल्कि वास्तविक कार्यों से होता है। छात्रों की जायज़ मांगों को अनदेखा करना न केवल उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि महाविद्यालय की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुँचाना है।

छात्रों का यह आंदोलन प्रशासन की निष्क्रियता और लापरवाही के खिलाफ एक सशक्त कदम है। उनकी मांगें जायज़ हैं और महाविद्यालय की बेहतरी के लिए आवश्यक हैं। अब यह देखना है कि प्रशासन कब जागेगा और छात्रों की समस्याओं का समाधान करेगा। महाविद्यालय प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए, छात्रों की मांगों को शीघ्र पूरा करना चाहिए, ताकि महाविद्यालय का भविष्य उज्जवल और समृद्ध हो सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!