धरती पर बढ़ते पाप का अंत: श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में महर्षि उत्तम स्वामी महाराज ने किया धर्म की पुनः स्थापना का आह्वान

जहाजपुर, (अनिल सोनी)। जब जब धरती पर पाप और अत्याचार अपनी सीमाएं पार करते हैं, तब भगवान अवतार लेकर पापियों का नाश करते हैं और धर्म की स्थापना करते हैं। राजा कंस के अत्याचारों का अंत करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने जेल में जन्म लिया और धरती पर धर्म की पुनः स्थापना की। यह प्रेरणादायक विचार महर्षि उत्तम स्वामी महाराज ने कस्बे में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शुक्रवार को व्यक्त किए।

श्रीमद्भागवत कथा में भक्ति की बौछार, गूंजा जय कन्हैया लाल की
कथा के दौरान महर्षि उत्तम स्वामी महाराज ने गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, वामन अवतार और कृष्ण जन्मोत्सव के पावन प्रसंग सुनाए, जिससे उपस्थित श्रद्धालुओं में भक्ति की लहर दौड़ गई। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व धूमधाम से मनाया गया, जिसमें समूचा पंडाल “जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से गूंज उठा। भगवान श्रीकृष्ण की संजीव झांकी प्रस्तुत की गई, जिसमें नन्हे कृष्ण को वासुदेव जी पालने में सजाकर लाए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की और मिठाइयां, प्रसाद और टॉफियां वितरित कर खुशी मनाई।

धार्मिक उत्सव में राजनीतिक हस्तियों की उपस्थिति
कृष्ण जन्मोत्सव के इस भव्य आयोजन में मुख्य जजमान भंवरलाल टाक, दीपक टाक, राजेंद्र टाक, रमेश टाक और उनके परिवारों ने टोपियों और खिलौनों की बौछार कर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कथा के इस महत्वपूर्ण अवसर पर स्थानीय विधायक गोपीचंद मीणा, मांडलगढ़ विधायक गोपाल लाल शर्मा, केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम की धर्मपत्नी रजनी शर्मा और युवा नेता हेमन्त टोडारायसिंह ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

नारायणी धाम के महासंगम कार्यक्रम का विमोचन
महर्षि उत्तम स्वामी महाराज ने इस दौरान नारायणी धाम, अलवर के महासंगम कार्यक्रम के पोस्टर का विमोचन भी किया। इस विशेष अवसर पर नारायणी ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक सरना और अन्य प्रमुख गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

धर्म और राजनीति का संगम
यह आयोजन न केवल धार्मिक उत्सव का प्रतीक था, बल्कि स्थानीय राजनैतिक हस्तियों की उपस्थिति ने इसे एक महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम बना दिया। भक्ति और आस्था के इस महापर्व ने कस्बे के माहौल को पूरी तरह से भक्तिमय बना दिया और लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

कथा का संगीतमय माहौल
श्रीमद्भागवत कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति संगीत का आनंद लिया और कथा के हर पल को जीते हुए अपने जीवन में भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया। कथा नियमित रूप से दोपहर 2:00 से 5:00 बजे तक आयोजित की जा रही है, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा ले रहे हैं।

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