भारत में एम पॉक्स वायरस की स्थिति और तैयारियाँ: डॉ. लियाकत अली मंसूरी की समीक्षा

एम पॉक्स, जिसे पूर्व में मंकीपॉक्स के नाम से जाना जाता था, एक दुर्लभ वायरस से उत्पन्न बीमारी है जो मुख्यतः अफ़्रीका में पाया जाता था। हाल के वर्षों में, इस वायरस ने अन्य देशों में भी फैलाव दिखाया है, जिनमें भारत के पड़ोसी देश शामिल हैं, जिससे भारत में भी इसके संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।

लक्षण और संक्रमण:
एम पॉक्स के प्रारंभिक लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं और इनमें बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, और त्वचा पर चपटे लाल दाने शामिल होते हैं। गंभीर मामलों में निमोनिया, सिर में सूजन, और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

संक्रमण का फैलाव:
एम पॉक्स का संक्रमण संक्रमित व्यक्ति या जानवर के संपर्क से फैलता है। यह संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के घाव, पपड़ी, और श्वसन बूंदों के संपर्क से हो सकता है। संक्रमित जानवरों और संक्रमित सामग्री जैसे कपड़े और बिस्तर के संपर्क से भी यह वायरस फैल सकता है।

यूनानी चिकित्सा:
यूनानी चिकित्सा में एम पॉक्स के लक्षणों के आधार पर उपचार प्रदान किया जाता है। डॉ. लियाकत अली मंसूरी के अनुसार, उपचार में शर्बत खाकसी, खमीरा आबरेशम, और त्वचा पर मरहम काफूरी का उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त, नीम के पत्तों से स्नान भी राहत प्रदान कर सकता है।

रोकथाम के उपाय:

  • चेचक का टीका: एम पॉक्स के संक्रमण को रोकने के लिए यह एक प्रभावी उपाय हो सकता है।
  • संपर्क से बचाव: संक्रमित जानवरों और लोगों से संपर्क से बचें।
  • हाथ धोना: हाथों को बार-बार धोएं और संक्रमित सामग्री से बचें।
  • सुरक्षित यौन संबंध: सुरक्षित यौन संबंध बनाएं और मास्क पहनें।

डॉ. लियाकत अली मंसूरी की सलाह:
डॉ. लियाकत अली मंसूरी, यूनानी चिकित्सक और हिजामा थैरेपी विशेषज्ञ, ने सलाह दी है कि एम पॉक्स के मामलों में घर पर रहना और सभी सावधानियाँ बरतना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारत में एम पॉक्स के खतरे को देखते हुए, सरकारी और स्वास्थ्य विभाग ने आवश्यक तैयारियाँ शुरू कर दी हैं ताकि वायरस के फैलाव को रोका जा सके और संक्रमित व्यक्तियों को उचित चिकित्सा प्रदान की जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!